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: ईमेल -Date 24 July 2026-From,Dr Pancham Rajbhar,drprajbhar1962@gmail.com To,cmup • cmup@nic.incsup • csup@nic.inpsecforest-up@nic.insecforest-up@nic.inspsecforest1-up@nic.inspsecforest2-up@nic.indysecforest-up@nic.inusecforest-up@nic.inpccf-up@nic.inpccf_up@nic.insecy-pccfup@nic.inpccfup@yahoo.co.inpccfup@yahoo.compccfwl-up@nic.inccfsfcomcentre@gmail.comcccpao@nic.inccfgonda@nic.inccfup@nic.indfosohelwa-up@gmail.comdfosohelwa-up@nic.incfgn-up@nic.inborlko@nic.in *अनुस्मरण पत्र* महत्वपूर्ण सेवामें माननीय मुख्यमंत्री जी उ प्र शासन लखनऊ सन्दर्भ - शासन स्तर-नीतिगत निर्णय विषय - सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग बलरामपुर का नाम परिवर्तित कर शुद्ध नामकरण *राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर वन्य जीव प्रभाग* किये जाने हेतु विभाग/मुख्याल की अनापत्ति सहित सहमति के बावजूद भी प्रलंबित प्रकरण में त्वरित राष्ट्रहित में नीतिगत निर्णय लिए जाने के संबंध में -महोदय, आप अवगत ही हैं कि 11 वीं सदी के राष्ट्रनायक तत्कालीन श्रावस्ती के सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर जी की जन्मस्थली,कर्मस्थली श्रावस्ती राज्य में रही है । तथा कालांतर में महाराजा सुहेलदेव जी के राज्याधीन श्रावस्ती/बहराइच अद्यतन उ प्र राज्य के विभिन्न क्षेत्रीय जिले गोण्डा,श्रावस्ती,बहराइच,बलरामपुर आदि नाम से विघटित हुए हैं और उसका एक बड़ा भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित रहा है तथा वर्तमान में उक्त बचे हुए अवशेष वन्य क्षेत्र लगभग 452.75 वर्ग किमी जो नेपाल देश की सीमा तक फैला हुआ है *सोहेलवा वन्य जीव विहार के नाम से 5 रेन्जों में बंटा हुआ सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग बलरामपुर* में अवस्थित है । उक्त सोहेलवा नामकरण जो महान राष्ट्रभक्त शासक महाराजा सुहेलदेव भर/राजभर जी के नाम का अपभ्रंश,अशुद्ध,अपमानजनक अमर्यादित एवं असंसदीय नामकरण सोहेलवा है जिसका शुद्धिकरण किये जाने हेतु मेरे द्वारा व अन्य द्वारा भी लिखित रूप से साक्ष्यों सहित अनवरत प्रयास के बाद दिनाँक 8 जुलाई 2002 को शासनादेश निर्गत हुआ जिसमें सिर्फ *सोहेलवा वन्य जीव विहार* का नाम परिवर्तित कर सुहेलदेव वन्य जीव विहार किया गया। परन्तु 5 रेन्जों को मिलाकर गठित सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग का नाम कतिपय कारणों से नहीं किया गया जबकि प्रभाग का नाम शुद्ध कर *राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव भर अथवा राजभर वन्य जीव प्रभाग* किये जाने हेतु मेरे द्वारा शासन/विभाग को तथ्यों सहित तमाम लिखित प्रत्यावेदन दिए जाने के क्रम में परीक्षणोपरांत शासकीय पत्रांक- वी आई पी-/36/81-4-2023 दिनाँक 20/08/2023 के प्रतिउत्तर में *प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव प्रभाग उ प्र* लखनऊ के पत्र सं 833/16/12-(वी आई पी सन्दर्भ) दिनाँक 14 सितंबर 2023 द्वारा नाम परिवर्तन हेतु *अनापत्ति सहित सहमति* एवं विभागीय जांच आख्या प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष उ प्र लखनऊ के पत्र सं 602/(सू0अ0)/दिनाँक 20/03/2024 द्वारा अपर मुख्य सचिव पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन उ प्र शासन को तदक्रम में अनुरोधनुसार विधिक रूप से सकारात्मक नीतिगत निर्णय लेते हुए उच्चादेश हेतु वांछित आख्या सम्प्रेषित की गई है। तथा वर्ष 2024 एवं 2025 में भी विभाग/मुख्यालय द्वारा मेरे द्वारा निवेदित अभ्यावेदन के क्रम में संस्तुति सहित प्रपत्र शासन को सम्प्रेषित है ।जो अद्यतन लगभग 2 वर्षों से शासन में प्रलंबित है । अतः आपसे प्रबल अनुरोध है कि वर्णित परिस्थितियों में जनभावनाओं का समादर करते हुए विभागीय/मुख्यालय द्वारा सम्प्रेषित अनापत्ति सहित सहमति के आलोक में राष्ट्रभक्त महाराजा सुहेलदेव जी के विकृत अमर्यादित अशुद्ध नाम सोहेलवा का शुद्धिकरण कर वन्य जीव प्रभाग का पूरा नामकरण * राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव भर अथवा राजभर वन्य जीव प्रभाग* किये जाने का राष्ट्रहित में अविलंब शासन स्तर पर नीतिगत निर्णय लेते हुए उच्चादेश निर्गत किये जाने हेतु तत्सम्बन्धित को आदेशित करने की कृपा करें । आभारी रहूंगा कि कृत कार्यवाही से हमें भी अवगत कराने की कृपा करेंगे ।सम्मान सहित संलग्नक -यथोपरि प्रतिलिपि -निम्नलिखित को समुचित कार्यवाही हेतु सादर सूचनार्थ सम्प्रेषित । 1- माननीय मंत्री जी वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग उ प्र शासन-2- मुख्यसचिव महोदय उ प्र शासन-3- अपर मुख्य सचिव महोदय उ प्र शासन-4- प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष उ प्र-5-प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव प्रभाग उ प्र-6-मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव (पूर्वी) उ प्र गोण्डा-7-मा अध्यक्ष जी राजस्व परिषद उ प्र एवं तत्सम्बन्धित । भवदीय डॉ पंचम राजभर Ex-सम्पादक, सुहेलदेव स्मृति मा प &ex-राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय राजभर संगठन -आवास-कुरथुवा, सोनहरा, बरदह जनपद आज़मगढ़ -276301- drprajbhar1962@gmail.com-9889506050/9452292260

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डॉ पंचम राजभर

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*गढ़वा के पुरावशेषों की कहानी 1700 से 2000 साल पुरानी👇* https://expressajeet.blogspot.com/2026/07/1700-2000.html

स्मृतियाँ - 2015 लगभग 11 वर्ष पूर्व -नई दिल्ली -विमुक्त घुमंतू अर्ध घुमंतू जनजाति समुदाय के प्रतिनिधियों का नेशनल सेमिनार - प्रतिभाग - डॉ पंचम राजभर

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13 जुलाई 2026 को असम प्रदेश से भर/राजभर समाज के प्रतिनिधियों द्वारा प्रदेश का अंग वस्त्र देकर श्री जनार्दन राजभर,श्री कैलाश राजभर,श्री सुबल भर,श्री हरिनाथ भर,श्री चन्दन भर,श्री कृष्णा भर आदि द्वारा परंपरागत सस्नेह सम्मान किया गया । डॉ पंचम राजभर

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