इतिहासकारों की दृष्टि में भर Bhar जाति

 भर (भरत )राजभर जाति को अंग्रेज इतिहासकारों की दृष्टि मे✍️✍️✍️

जरूर पढ़ें

अंग्रेजो द्वारा भर,भरत,राजभर जाति के विषय मे लिखी गई सामग्री के सम्बन्ध मे उनकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है.....

 भर Bhar भी एक प्राचीन जाति है! इस जाति के नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा है! आज भारत के किसी भी क्षेत्र मे जाइये इस जाति के नाम पर स्थानों के नाम अवश्य मिल जाएँगे!

 बिहार प्रान्त का नाम भी इसी जाति के नाम पर पड़ा है दी ओरिजनल इन है विटनेस ऑफ़ भारतवष के पृष्ट ४० पर लिखा है कि काशी के निकट बरना नामक नदी तथा बिहार नामक शास्त्र भर शब्द से निकला है!

 एक समय मे भर भरत लोग इस प्रान्त पर शासन करते थे और इन्ही कि प्रधानता भी थी बिहार मे गया के पास ,बार्बर पड़ी पर शिवलिंग स्थापित है इसे भी एक भर महाराजा ने ही बनवाया था..

🌳🌳अंग्रेज इतिहासकार🌳🌳

मिस्टर शोरिंग

डॉ. बी. ए. स्मिथ

डी. सी. बैली

मिस्टर रिकेट्स

मि. गोस्त्ब आपर्ट पी. एच. डी.

मिस्टर पी. करनेगी

लेफ्टिनेंट गवर्नर मि. थानसन

एच. आर. नेविल

मि. डब्लू क्रोक तथा मि. सर हेनरी इलिएट

एच. एम. एलियट

मि. डव्लू. सी. बेनट

मि. सर ए. कनिघम

बन्दोवस्ती ऑफिसर( अवध प्रान्त) मि. उड़वार्ण

मि. डी. एल. ड्रेक ब्रक्मैन

मि. सी. एश. एलियट

डॉ. ओलधम

मिस्टर शोरिंग:

भर या भार जाति उतरी भारत के गोरखपुर से मध्य भारत के सागर जिले तक पाई जाति है! यहाँ के निवासी इस जाति को भार, राजभर, भरत तथा भरपतवा के नाम से जाने जाते है! आजमगढ़ के भरो का राज्य श्री रामचंद्र के राज्य के समय अयोध्या से मिला हुआ था! अवध प्रान्त मे भरो कि शक्ति बड़ी ही प्रबल थी! प्रयाग से काशी तक इनका सुदृढ़ शासनाधिकार था! भर भरत जाति को असभ्य जाति से जोड़ना सही न होगा क्योकि इनके कार्य कलापों को देखकर किसी राजवंश का इन्हें कहा जा सकता है! 

व्यवासय के आधार पर उत्तर प्रदेश मे इनका कोई निश्चित व्यापार या व्यवासय नहीं है जैसा कि अन्य हिन्दू जातियों को व्यवासय के आधार पर जाना जाता है! इनका व्यवासय प्राचीन काल मे युद्घ करना था जो इन्हें क्षत्रियो से जोड़ता है! (प्रमाण के लिए पढिये हिन्दू त्रैएब्स एंड कास्ट वालूम फास्ट पृष्ट ३५७) ! भर जाति के लोग पूर्ब काल मे हिन्दू धर्म के अनुसार उपासना करते थे! ( हिन्दू त्रैएब्स एंड कास्ट पृष्ट ३६०,३६१,३६२)

डॉ. बी. ए. स्मिथ

कुछ राजपूत प्राचीन निवासियो कि संतान है अर्थात मध्य प्रान्त तथा दक्षिण के भर क्रमश: उन्नति कर के अपने को राजपूत कहने लगे! बुन्देल खंड के चंदेल, दक्षिण के राष्ट्र कूट राजपूताने के राठोर और मध्यप्रांत के गोंड तथा भर यहाँ के राजपूत संतान है! ( अर्ली हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया चतुर्थ संस्करण) राजपूतो कि उत्पति गोंडा ख्ख्द और भर जाति से हुई है! यह भर जाति सूर्यवंशी, नागवंशी, भारशिव और बाद मे राजपुत्र कहलाई( देखे कंट्री बुसन तो दी हिस्ट्री ऑफ़ बुन्देल खंड , इंडियन अन्तेकर्री XXXII १९०८ पेज १३६,३७ ) !

डी. सी. बैली

अयोध्या के शाशक रामचंद्र ने भर शाशक, केरार को जौनपुर मे हराया था! यदि रामचंद्र (दशरथ के पुत्र ) भर को हराए थे तो ऐसा माना जा सकता है कि भर जाति अति प्राचीन है! ( देखे सेंसेस ऑफ़ इंडिया वोलुम XVI पेज २२१ (१८९१)!

मिस्टर रिकेट्स

भरो का सम्बन्ध उच्च जातियो से है! कही कही राजपूत लोग अपने लड़की कि शादिया भी करते है! इसके प्रमाण विशेस रूप से पाए जाते है इलाहाबाद मे भरोर्ष, गर्होर्स तथा तिकित लोग भरो के वंशज काहे जाते है! तिकित जाति कि एक लड़की से एक चौहान क्षत्री ने शादी कि थी और उसका लड़का उस भर राजा के राज्य पर शाशन करता था! कही कही राजपूत लोग अब भी अपने लड़कियों कि शादिया भरो से करते थे! (रिकेट्स रिपोर्ट पृष्ट १२८ )! प्रयाग के आसपास कि भूमि को उपजाऊ तथा सभ्य बनाने मे भरो ने अधिक परिश्रम क्या था!

मि. गोस्त्ब आपर्ट पी. एच. डी.

एक भर राजा था जिसके ५ पत्नी थी जिसमे एक स्वजतिए थी और तिन अन्य जाति कि थी, अंत मे जिन वंशो के पास आजकल भूमि है और अपने को प्राचीन राजपूत कहते है! चाहे वो सम्मान के भय और समाज कि लज्जा से बात को स्वीकार न करे, परन्तु वास्तव मे भरो के वंसज है! क्योकि किसी समय इस देश के प्रतेक एकड़ भूमि पर भरो का आदिपत्य और बोलबाला था! (दी ओरिजनल तैवितिंस ऑफ़ भारत्वार्स पृष्ट ४४,४५,४६)!

मिस्टर पी. करनेगी

भर लोग राजपूत वंस के है और पहले ये लोग यहाँ के राजा थे! कालांतर मे बोद्ध मत को स्वीकार कर लेने के पश्चात इनके प्रचारथ अदिकांश अन्य देसों मे चले गए! इनकी मुख्य जाति राजभर , भरद्वाज, भरत और कनोजिया कि है! भर लोग पुराने राजपूत तथा पूर्वी अवध के प्राचीन निवासी है! ( देखे रिसर्च ऑफ़ अवध पृष्ट १९ )!

लेफ्टिनेंट गवर्नर मि. थानसन

यधपि भर लोग अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लगभग ३०० वर्षो तक युद्घ करते रहे परन्तु असंगठित और कम संख्या मे होने के कारण तथा स्वधार्मियो के विरोध पक्ष ग्रहण करने से अधिक समय तक वे टिक न सके, तथापि इनके लिए यह कम गौरव की बात नहीं है जो देश की मर्यादा और स्वतंत्रता के लिए अपने सम्पूर्ण वैभव को नष्ट कर दिया ( देखे त्रिएब्स एंड कास्ट पृष्ट ३६३) !

एच. आर. नेविल

प्रतापगढ़ के भरो के सम्बन्ध मे जहा तक एतिहासिक प्रमाण मिलता है इससे सिद्ध होता है की इनके पूर्वज सोम्व्न्सीय है !( देखे प्रतापगढ़ गजियेटर पृष्ट १४४,१४५,१६७)

मि. डब्लू क्रोक तथा मि. सर हेनरी इलिएट

किसी समय इस जाति की सभ्यता का विकास पूर्ण रूप से था! भरो का सम्बन्ध भरताज वंश से था 

जिनकी पीढी जयध्वज से सम्बंधित है ! सम्भ्बतः महाभारत काल मे ये लोग "भरताज" नाम से विख्यात थे

 और पूर्बी भारत खंड मे भीमसेन द्वारा पराजित हुए थे! राम राज्य के समय इनका कुछ आभास मिलता है! इनके राज्य का विस्तार अवध, काशी,पश्चिमी मगध , बुन्देल खंड, नागपुर और सागर के दक्षिणी प्रान्त तक था! ( देखे ओरिजनल हेविटेंस ऑफ़ भारत वर्ष और इंडिया पृष्ट ३७, ३८ )

एच. एम. एलियट

भर स्वं को राजपूत से उच्च मानते है पूर्ब कथित पदवी राज के कारण नहीं! वे परस्पर एक दुसरे के साथ खाते पीते नहीं थे! भर लोग खुद को राजपूत मानते है! राजपूत और राजभर लोग दोनों ही राजाओ के वंशज है जो सूर्यकुल और चंद्रकुल से सम्बंधित है! ( देखे रेसेस ऑफ़ दी नॉर्थ- वेस्टर्न प्रोविन्सेस ऑफ़ इंडिया वोलुम फर्स्ट लन्दन १८४४)

मि. डव्लू. सी. बेनट

बुन्देल खंड मे अजयगढ़ और कालिंजर का इतिहास प्रकट करता है की एक आदमी जिसका नाम नहीं दिया गया है, वही परिवार का संचालक था! इसी के अधिकार मे अजयगढ़ का किला था! इस वंश की एक महिला गद्दी पर बिधि थी जिसका भाई दल का अंतिम राजा कन्नौज को परास्त कर के सम्पूर्ण ढाबे पर अधिकार क्या था! इसके बाद दल की मालकी तथा कालिंजर का नाश हुआ! 

इनके पास कड़ा और कालिंजर के दो किले थे! इनका विस्तार मालवा तक था! 

दक्षिण अवध के सांसारिक व्यावाहरो सि पूर्ण सिद्ध की ये शहजादे भर थे 

और घाघरा सि मालवा तक राज्य करते थे ! (देखे दी त्रिएब्स एंड कास्ट वोलुम सेकंड पृष्ट ३ ) !

मि. सर ए. कनिघम

किसी समय देश मे भरो का बोल बाला था! जिनके प्रभुत्व और सभ्यता की प्राचीन परंपरा आज तक चली आ रही है ! ( देखे हिन्दू त्रिएब्स एंड कास्ट वोलुम फर्स्ट पृष्ट ३६२)

बन्दोवस्ती ऑफिसर( अवध प्रान्त) मि. उड़वार्ण

भर जाति शुर वीर पराकर्मी रन कुशल और कला निपुण थी! और काफी लंबे लंबे होते थे उनकी सभ्यता स्वयंकी उपार्जित सभ्यता है !

मि. डी. एल. ड्रेक ब्रक्मैन

आर्यों मे से भर भी एक जाति है! एतिहासिक प्रमाणों द्वारा ये सिद्ध है की आजमगढ़ के प्राचीन निवासी भर भरत तथा राजभर है ! (देखे आजमगढ़ गजेटियर पृष्ट ८४ और १५५)

मि. सी. एश. एलियट

भरो ने ईसा के थोड़े ही काल बाद आर्य सभ्यता का विकाश किया! भरो ने कनक सेना की अध्यक्षता मे अपनी विपक्षी कुसनो को गुजरात तथा उतरोतर नामक पहाडो की और मार भगाया!

डॉ. ओलधम

बुद्ध काल के अवनति के समय भर भरत इस देश पर शासन करते थे! अंग्रेजो ने भर, जाति के विषय मे जो कुछ भी लिखा है उस सबको एक छोटी सी पुस्तक मे समेट पाना बहुत ही मुस्किल कार्य है! 

यदि हम चाहे की भर जाति के विषय मे उनके द्वारा लिखी गई रिपोर्ट, जनगणना रिपोर्ट, गजेटियर्स आदि का अध्ययन ही कर लेवें .............    

डॉ पंचम राजभर -drprajbhar1962@gmail.com,9889506050 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Grievance Status for registration number : PMOPG/E/2020/0712909 Grievance Concerns To Name Of Complainant डॉ पंचम राजभर Date of Receipt 05/08/2020 Received By Ministry/Department Prime Minister's Office Grievance Description महत्वपूर्ण/तत्काल प्रतिष्ठामें, माननीय संस्कृति मंत्री जी भारत सरकार नई दिल्ली सन्दर्भ - संस्कृति विभाग/पुरातत्व विभाग - विषय - भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा ऐतिहासिक/सांस्कृतिक भग्नावशेष को सरकारी संरक्षण में लिए जाने के सम्बंध में महोदय, आप अवगत ही हैं कि भारतीय संस्कृति सभ्यता के ऐतिहासिक साक्ष्यों यथा किला कोट,खण्डहर, के भग्नावशेष को सुरक्षित सुव्यवस्थित रखकर आमजनमानस के स्मृति में राजकीय संरक्षण प्रदान किये जाने की बहुप्रचलित वैधानिक कार्य सुनिश्चित है जो कि अत्यंत सराहनीय है उक्त के क्रम में सादर आपके संज्ञान में अवगत कराना है कि जनपद अम्बेडकरनगर के तहसील सदर एवं नगर पालिका अम्बेडकर नगर के वार्ड सं 19 सुझौली के अधीनस्थ लोरपुर अठखम्भा जो कि एक प्राचीन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहर है जिसका वर्णन तत्कालीन भारशिव नागवंशी सुझावल के भर समुदाय के शासक द्वारा निर्मित होने का उल्लेख यूनाइटेड प्रविन्सेज ऑफ अवध के प्रामाणिक गजेटियर वॉल्यूम 3 N to Z में वर्णित है तथा वर्तमान में उक्त अष्ट खंभों का ऐतिहासिक अलौकिक साक्ष्य में से कुछ खम्भे पूरी तरह टूटकर गिरने के कगार पर है जो कि स्थानीय लोगों एवं भारशिव नागवंश बंशजों के प्राचीन काल से सुसभ्य संस्कृति, सभ्यता आस्था,विश्वास शोध का केंद्र है इतना ही नहीं स्थानीय लोगों ने शासन प्रशासन से उक्त अठ खंभें के अवशेष को पुनर्मरम्मत कर बचाये जाने का काफी प्रयास किया गया लेकिन सरकार द्वारा अभी तक कोई भी समुचित कार्यवाही नहीं हुई जिससे लोगों निराशा की भावना बलवती हो रही है अतः आपसे प्रबल अनुरोध है कि वर्णित परिस्थितियों में जनभावनाओं का समादर करते हुए भारतीय पुरातत्व विभाग सारनाथ वाराणसी सर्किल द्वारा उक्त जीर्ण शीर्ण अवस्था मे पड़े टूटे हुए सामग्री की पुनर्मरम्मत कर जीर्णोद्धार करते हुए सुरक्षित,सुव्यवस्थित संरक्षित रखे जाने हेतु सक्षम प्राधिकारी को निर्दर्शित कर वस्तुस्थिति से मुझे भी अवगत कराने की कृपा करें सम्मान सहित भवदीय डॉ पंचम राजभर Ex- सम्पादक -सुहेलदेव स्मृति (मा प) पूर्व राष्ट्रीय महासचिव ,अखिल भारतीय राजभर संगठन -- आवास- कुरथुवा ,सोनहरा आज़मगढ़ उ प्र 276301 मो 9452292260/9889506050 drprajbhar1962@gmail.com Current Status Case closed Date of Action 26/08/2020 Remarks Suggestion noted. Action is being taken. Rating 2 Average Rating Remarks महोदय कृपया सारनाथ सर्किल द्वारा स्थलीय सर्वेक्षणोपरांत अद्यतन विभागीय स्तर पर कृत कार्यवाही से हमें भी अवगत कराना चाहें डॉ पंचम राजभर Officer Concerns To Officer Name V S Badiger (Director) Organisation name Archeaological Survey of India Contact Address Dharohar Bhawan24 Tilak Marg Email Address vsbadiger.asi@gov.in Contact Number 01123004570