राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर
: महत्वपूर्ण
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पत्रांक 544/24-
दिनांक 30/09/2024-
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प्रतिष्ठा में.
माननीय राष्ट्रपति जी
भारत गणराज्य
राष्ट्रपति भवन
नई दिल्ली
सन्दर्भ- पी एम ओ/गृह/शिक्षा/दूरसंचार/राजस्व/संस्कृति मंत्रालय भारत / उ प्र सरकार-
विषय - 11वीं सदी के राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव जी की भी अन्य महापुरुषों की तरह सुनिश्क्षित जाति का प्रामाणिक अभिलेखों, साक्ष्यों के आधार पर भर/राजभर जाति अर्थात महाराजा सुहेलदेव राजभर अंकित किये जाने के सम्बंध में-
महोदय,
सादर याचना सहित आपका ध्यान उ० प्र० में अत्यंत महत्वपूर्ण संवेदनशील विषय की तरफ आकृष्ट कराना है कि 11वीं सदी के राष्ट्रनायक श्रावस्ती के सम्राट महाराजा सुहेलदेव जी के जीवन वृतान्त की कड़ी में उनका पूरा नामकरण महाराजा सुहेलदेव राजभर किये जाने हेतु सकारात्मक कार्यवाही करना निवेदित है। जैसा कि आप भी अवगत है कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था के विधान में प्रचलित चतुष्वर्गीय वर्णाश्रम में विखण्डित जातिगत व्यवस्था के आधार पर जिस तरह अन्य महापुरुषों का पूरा नाम लिखा जाता है जैसे वंश, कुल, गोत्र, वर्ग, समुदाय, जाति आदि का नाम के आगे व उनकी पृष्ठभूमि में पूरा उल्लेख होता है। उसी तरह से महाराजा सुहेलदेव जी के भी नाम के आगे उनके पूरा नाम राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर (भर) लिखे जाने हेतु तमाम सम्मानित मा जनप्रतिनिधियों एवं उनके अनुयायी वंशजों द्वारा उनकी जाति भर/राजभर अंकित किये जाने के संबंध में अर्थात हर जगह महाराजा सुहेलदेव राजभर (कुछ स्थानों को छोड़कर जैसे लखनऊ में अधिष्ठापित प्रतिमा के शिलापट्ट जिस पर निदेशक संस्कृति विभाग उ प्र सरकार तथा वाराणसी में मा मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश के क्रम में स्पष्ट रूप से महाराजा सुहेलदेव राजभर अंकित है- संलप्रक) का अंकन, लेखन, उदबोधन, संबोधन, प्रबोधन हेतु अनवरत लिखित रूप से अनुरोध किया जा रहा है। जैसे कि अधूरे नामकरण महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय, डाक टिकट, मेडिकल कालेज, ट्रेन, स्मारक स्थत आदि पर भी पूरा नाम महाराजा सुहेलदेव राजभर तिखे जाने हेतु अनवरत निवेदन किया किया जा रहा है परंतु अभी तक अनुरोधनुसार सकारात्मक कार्यवाही नही हो रही है तथा प्रकरण अद्यतन लिखा जाना प्रलंबित है। जबकि अन्य महापुरुषों के नाम के आगे प्रायः जातीय उदबोधन का प्रयोग किया गया है लेकिन महाराजा सुहेलदेव जी के आगे राजभर (भर) का अनु प्रयोग हर जगह नहीं किया गया है। जिससे लोगों में वास्तविक इतिहास के प्रति भ्रम की स्थिति बनती जा रही है। जबकि लगभग 55 स्वदेशी, ब्रिटिश, मुस्लिम सरकारी गजेटियर आदि में लेखकों/ इतिहासकारों ने प्रामाणिक अभिलेखों
/साक्ष्यों के आधार पर महाराजा सुहेलदेव जी को भारत की प्राचीन मूलतः दलित शासक कौम भरत वंशीय/भारशिव नागवंशीय भर/राजभर (Bhar/Rajbhar) जाति का ही स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है। यथा-1-बहराइच ए गजेटियर खंड-एक्सएलवी-1921,2-अवध प्रांतों का गजेटियर। तीन खंड प्रथम प्रकाशित 1877-78। 3-सुल्तानपुर. 1903 खंड XIVI-4-आजमगढ़ 1911 खंड. XXXIII-5-बनारस 1909 वॉल्यूम XXVI.6- जौनपुर 1908. वॉल्यूमXXVIII। डिस्ट्रिक्ट गजेटियर लिखित -एचआर नेविल, 7-भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण खंड-XI XII 1875 से 78 ए कनिंघम द्वारा 8-भारतीय पुरावशेष खंड-1 1872, और 9- खंडXll 1884.जेए 5 बर्गिस द्वारा, 10-
राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव जी के संबंध लगभग 45 स्वदेशी, ब्रिटिश,तुर्क,मुस्लिम एवं सरकारी गजेटियर आदि में लेखकों/ इतिहासकारों ने प्रामाणिक अभिलेखों
/साक्ष्यों के आधार पर महाराजा सुहेलदेव जी को भारत की प्राचीन मूलतः शासक कौम भरत वंशीय/भारशिव नागवंशीय भर/राजभर (Bhar/Rajbhar) जाति का ही स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है। यथा-1-बहराइच ए गजेटियर,खंड-एक्स, एलवी-1921,2-अवध प्रांतों का गजेटियर तीन खंड प्रथम प्रकाशित 1877-78। 3-सुल्तानपुर. 1903 खंड,XIVI-4-
आजमगढ़ 1911 खंड.XXXIII-5-
बनारस,1909 वॉल्यूम XXVI-6- जौनपुर 1908.वॉल्यूमXXVIII-डिस्ट्रिक्ट गजेटियर -एचआर नेविल, 7-भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण खंड-XI XII 1875 से 78-ए कनिंघम द्वारा 8-भारतीय पुरावशेष खंड-1-1872,-9- खंडXll-1884.जेए 5 बर्गिस द्वारा,10-
क्रॉनिकल्स ऑफ उन्नाव 1862- सी ए इलियट द्वारा, 11- मिन्हाजुद्दीन्स
-तबाकतए-नासिरी 1881-लंदन- एचजी रोवर्टी द्वारा,12- द इंडियन विलेज कम्युनिटी डिस्ट्रिक्ट मैनुअल्स। बी एच बोडेन पॉवेल द्वारा 1986,14- अवध की नस्लों, जनजातियों,जातियों, प्रांतों के नोट्स पैट्रिक कॉर्नेगी द्वारा 1868,15- उत्तरी भारत की जाति व्यवस्था-ई ए एच ब्लंट,आईसीएस, 16-भारत की जनगणना 1891, खंड XVI द्वारा। अवध के उत्तर पश्चिमी प्रांत. डी सी बैली आईसीएस द्वारा, 17- तारीख-ए-मसूदी लेखक, हाजी से खुर्शीद बयासी रिजवी, 18- मीरेऊती-मसूदी ले. सिद्दीक हसन कादरी, 19-अलमानी ते-ख्वाजा खलील अहमद शाह, 20- बिब्लियोथेका इंडिका एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल नई सीरीज-2728273 तबकात-ए-नसिरी। मेजर एच जी रोवर्टी द्वारा, 21- गोंडा जिले पर अंतिम निपटान रिपोर्ट 1878। डब्ल्यू सी बेनेट द्वारा, 22- भारतवर्ष या भारत के मूल निवासियों पर 1972 में गुस्ताव ओपर्ट द्वारा, 23- प्राचीन भारत का इतिहास 1942- आर एस त्रिपाठी-24- उत्तर प्रदेश फैजाबाद का जिला गजेटियर श्रीमती ईशा बसंती जोशी द्वारा, 25- सचित्र पीसी मुखर्जी द्वारा लखनऊ 2003-,27- भारत की जनगणना 2011-
श्रृंखला 10 भाग XII-बी-बहराइच की जिला जनगणना पुस्तिका-28-मसूद-
ए-मिल्लत अल्हाज बयाया ए मसूदी, मौलाना मु अली मसूदी 29- राष्ट्ररक्षक महाराजा सुहेलदेव परशुराम ले गुप्ता 30- अहमद अमीन, 31-डॉ विल्टन ओल्डहोम, 32-डी टी रॉबर्ट्स, 33-अली दुरोगा अब्बास, 34- जॉर्ज स्मिथ, 35- एचजी इरविन,36- आईने अकबरी खंड- I एवं खंड II, कर्नल एच.एस.जर्सट द्वारा,- 37-मिरात-ए-1625ई ले.अब्दुल रहमान चिश्ती, 38-तवारीख ए महमूदी -998ई ले. मौला मोहम्मद गजनवी 39-तारीख
-अस-सुबुक्तगीन-1059 ई-ले.अबुल फजल बेहकी,40-जे.चार्ल्स विलियम्स-अवध की जनगणना पर रिपोर्ट खंड-1-1869 -लखनऊ, आदि ऐतिहासिक तथ्यों और जनश्रुतियां,प्रचलित कथाओं के अनुसार महाराजा सुहेलदेव जी को भर/राजभर जाति का स्पष्ट उल्लेख किया गया है ।
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डॉ पंचम राजभर
Ex-सम्पादक, सुहेलदेव स्मृति मा प & पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय राजभर संगठन- आवास- कुरथुवा, सोनहरा,आज़मगढ़ उ प्र-9889506050/9452292260-drprajbhar1962@gmail.com